गुरु नाभा दास जी की जयंती
गुरु नाभा दास जी की जयंती प्रतिवर्ष 8 अप्रैल को बड़े उत्साह, श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाई जाती है। हर वर्ष, गाँव झरेरियाना में इस अवसर पर प्रभातफेरी, शोभायात्रा, और विशाल लंगर का आयोजन होता था। यह दिन केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि गुरु नाभा दास जी के विचारों और शिक्षाओं को आत्मसात करने का अवसर होता है।

इस वर्ष जयंती का आयोजन
गाँव में इस वर्ष कई दुःखद घटनाएँ घटी हैं। बहुत से परिवारों ने अपनों को खोया है, जिससे पूरा गाँव शोक में डूबा हुआ है। इस कठिन समय को देखते हुए, गुरु नाभा दास जी के भक्तों ने निर्णय लिया है कि इस वर्ष कोई प्रभातफेरी और शोभायात्रा आयोजित नहीं की जाएगी।
हालाँकि, गुरु नाभा दास जी के आशीर्वाद से **लंगर सेवा** यथावत जारी रहेगी। यह लंगर उन सभी के लिए एक संदेश होगा कि गुरु महाराज की सेवा कभी नहीं रुकती। यह सिर्फ भोजन नहीं, बल्कि प्रेम, सेवा और समर्पण का प्रतीक है।
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गाँव के परिवारों के प्रति संवेदना
गाँव के वे सभी परिवार जिन्होंने अपने प्रियजनों को खोया है, उनके प्रति हम सभी गहरी संवेदना व्यक्त करते हैं। यह केवल एक व्यक्तिगत क्षति नहीं, बल्कि पूरे गाँव का नुकसान है। हम प्रार्थना करते हैं कि गुरु नाभा दास जी उन सभी परिवारों को शक्ति प्रदान करें और उनका दुःख सहन करने की क्षमता बढ़ाएँ।
गुरु नाभा दास जी ने हमें हमेशा करुणा, प्रेम और धैर्य का मार्ग दिखाया है। इस कठिन घड़ी में हम सभी को एक-दूसरे का साथ देना चाहिए और गुरु महाराज की शिक्षाओं पर चलना चाहिए।
गुरु नाभा दास जी के जीवन और शिक्षाएँ
गुरु नाभा दास जी संत परंपरा के महान संतों में से एक थे। उन्होंने **भक्तमाल** की रचना की, जिसमें विभिन्न संतों के जीवन और शिक्षाओं का वर्णन किया गया है। उनकी शिक्षाएँ हमें बताती हैं कि सच्ची भक्ति का मार्ग सेवा और परोपकार से होकर जाता है।
गुरु जी का जन्म ऐसे समय में हुआ था जब समाज में भेदभाव बहुत अधिक था। उन्होंने अपने पूरे जीवन को समानता, प्रेम और भक्ति के प्रचार में समर्पित कर दिया। उन्होंने यह सिखाया कि इंसान की पहचान जाति, धर्म या वर्ग से नहीं, बल्कि उसके कर्मों और भक्ति से होती है।

गुरु नाभा दास जी के विचार
- सभी इंसान समान हैं – गुरु जी ने जाति-पाति से ऊपर उठकर समाज में समानता का संदेश दिया।
- सच्ची भक्ति सेवा में है – उन्होंने कहा कि भगवान की पूजा केवल मंदिरों में नहीं, बल्कि गरीबों की सेवा में भी होती है।
- सत्संग और भक्ति मार्ग – उन्होंने जीवन भर भक्ति और संत संगति का महत्व बताया।
- धैर्य और सहनशीलता – कठिनाइयों में भी भगवान पर अटूट विश्वास बनाए रखने की प्रेरणा दी।
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गुरु जी के आशीर्वाद से आगे बढ़ें
इस वर्ष का जयंती उत्सव भले ही भव्य न हो, लेकिन गुरु जी का आशीर्वाद हम सभी के साथ है। उनका संदेश हमें बताता है कि सेवा, भक्ति, और करुणा ही सच्चे संत के मार्ग हैं।
आइए, हम सभी इस कठिन समय में एक-दूसरे का हाथ पकड़ें और गुरु जी की शिक्षाओं को अपनाकर अपने जीवन को प्रकाशमय बनाएं।
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